लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुई भीड़ की हिंसा में पुलिस अफसर की हत्या करने और दंगा फैलाने के मामले का मुख्य आरोपी और बजरंग दल का जिला अध्यक्ष योगेश राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

खबर के अनुसार मुख्य आरोपी को दंगा फैलाने के आरोप में घटना के तीन दिन बाद गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही योगेश राज ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं था और हिंसा से उसे कोई लेना देना नहीं है. राज ने यह भी दावा किया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही थी.

प्रवीण भाटी ने भी योगेश के बयान का किया बचाव

बजरंग दल के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक प्रवीण भाटी ने भी कहा था कि योगेश राज का हिंसा की इस घटना से कोई लेना देना नहीं है. भाटी ने कहा कि वह सही समय आने पर पुलिस को जांच में मदद करेगा.

सोमवार को बुलंदशहर के स्याना गांव में गोकशी की अफवाह के बाद हिंसा फैल गई थी. इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंची और भीड़ को काबू करने का प्रयास किया. लेकिन बेकाबू भीड़ हिंसक होती गई और इसी दौरान पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक स्थानीय युवक की गोली लगने से मौत हो गई.

क्या है पूरा मामला?

पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर जिले में सोमवार दिन में यह अफवाह फैली थी कि यहां एक खेत में कथित रूप से गोवंश के टुकड़े मिले हैं. आरोप लगा कि एक संप्रदाय विशेष के लोगों ने गोहत्या की है. अफवाह फैलने के बाद लोगों ने गोवंश के शव के अवशेषों के साथ सड़क जाम कर दी. देखते ही देखते कुछ और गांवों के लोग जुट गए.

सैकड़ों लोगों के विरोध-प्रदर्शन करने की जानकारी मिलने पर पुलिस वहां पहुंची, जिसके बाद भीड़ का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने पुलिस पर पत्थराव शुरू कर दी. उपद्रवियों को काबू में करने के लिए पुलिस बल ने लाठीचार्ज कर दिया.

पुलिस ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की, जिसके बाद भीड़ और उग्र हो गई. सुमित कुमार नाम के एक लड़के को भी गोली लगी, जिसकी बाद में मेरठ के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. गुस्साई भीड़ ने बुलंदशहर के स्याना थाने को फूंक दिया. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह पर घेरकर हमला किया. भीड़ के प्रकोप से बचने के लिए सुबोध कुमार सिंह और उनकी टीम खेत में जा घुसी लेकिन उपद्रवियों ने पीछा कर उनपर वहां भी हमला बोल दिया.

पुलिस ने दर्ज की है दो एफआईआर

पुलिस ने इस मामले में 2 एफआईआर दर्ज किया है. इसमें 27 नामजद और 50-60 अज्ञात लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 302, 333, 353, 427, 436, 394 और 7 क्रिमिनल अमेंडमेंट लॉ के तहत एफआईआर दर्ज किया है. मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है.

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