दिल्ली का अग्निशमन विभाग रिमोट कंट्रोल वाली अत्याधुनिक मशीनों के साथ-साथ अब रोबोट से भी आग बुझाने का काम करेगा। इसके लिए वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किया जा चुका है। तंग गलियों और गगनचुंबी इमारतों के साथ सघन बस्तियों में लगने वाली आग पर रोबोट त्वरित गति से काबू कर पाएगा। यह दमकलकर्मियों और आम लोगों के हताहत होने पर अंकुश लगाने में सहायक होगा। दिल्ली अग्निशमन विभाग के निदेशक का कार्यभार देख रहे बिपिन कैंटल ने यह जानकारी दी।

दिल्ली में सामान्य तौर पर आग लगने की वारदातों के बाद यह पता नहीं चलता है कि आग किन कारणों से लगी। अमूमन देखने में आता है कि दिल्ली के दमकलकर्मी बिना कुछ सोचे-विचारे आग बुझाने में जुट जाते हैं और असमय काल के गाल में समा जाते हैं। राजधानी में सघन बस्तियों के साथ गगनचुंबी इमारतों की भी कमी नहीं है। जमीन की कमी और जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी के कारण निजी बिल्डरों से लेकर सरकारी एजंसियां ऊंची इमारतों का निर्माण कर रही हैं। इन इमारतों में आग लग जाए तो उस पर काबू पाने में जो कठिनाई होती है, उसका मुकाबला करने के लिए रोबोट ही एक कारगर विकल्प है। अत्याधुनिक मशीनें अपना काम करें लेकिन हताहतों की संख्या में भी कमी हो इस मकसद से ही दिल्ली अग्निशमन विभाग ने रोबोट को अपने बेड़े में शामिल करने का फैसला किया है।

कैंटल के मुताबिक दिल्ली मेट्रो के साथ मिलकर यह सारा इंतजाम हो रहा है। इससे झुग्गी-बस्तियों से लेकर बहुमंजिली इमारतों, स्टोर, गोदाम और जहां फायर टेंडर जाने की संभावना नहीं होती, वहां भी रोबोट काफी हद तक मददगार साबित होगा। यह रिहायशी 15 मीटर और औद्योगिक 12 मीटर के साथ-साथ ऊंची इमारतों के 32 मीटर तक ऊपर-नीचे यहां तक कि आड़े-तिरछे अपनी पहुंच बनाकर काम को आसान कर देगा। कैंटल कहते हैं कि सात करोड़ रुपए की लागत वाले घातक सामग्री ढ़ुलाई वाहन खरीदने का प्रस्ताव भी पास हो गया है और यह बहुत जल्द आने वाला है। इसे भी दिल्ली मेट्रो के मार्फत ही लाया जा रहा है। जैव रसायन और रेडियोधर्मी सक्रियता से निकलने वाली घातक किरणों से होने वाले नुकसान पर भी इससे अंकुश लगेगा।

रोबोटिक आर्म और रिमोट कंट्रोल के लिए दिल्ली अग्निशमन विभाग ने दिल्ली मेट्रो प्रबंधन को रकम भी दे दी है। टेंडर के कागजात भी जमा हो गए हैं। कई अत्याधुनिक तकनीक वाले फायर फाइटर के आयात का ठेका दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दिया गया है। आग से निपटने के लिए दिल्ली को ऐसे कई उपकरण मिलेंगे जिससे करोलबाग जैसी भीषण घटना पर कम समय में काबू पाया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि करोलबाग के अर्पित होटल की ऊपरी मंजिल पर न केवल रोबोटिक हाथ आसानी से पहुंच जाता बल्कि इमारत में घुसे बिना ही आग बुझाने का काम भी यह रोबोट कर लेता।

इस होटल में लगी आग में 17 लोगों की जान चली गई जबकि इससे पहले पहाड़गंज और सदर बाजार की तंग गलियों में आग ने कई लोगों की जान ले ली है। बकौल कैंटल रिमोट कंट्रोल डिवाइस से यह फायदा होगा कि पतली गलियों और सुरंग में भी बेहद आसानी से वह जा सकेगा, जहां जाने में फायर फाइटर की जान को काफी जोखिम होता है। ये डिवाइस झुग्गी-झोपड़ी, जेजे कॉलोनियोें और पुरानी दिल्ली की पतली गलियों के अंदर आसानी से घुसकर आग ही नहीं बुझाएगा बल्कि जानी नुकसान को भी बचाएगा। रोबोट बेसमेंट में भी जा सकता है और जिन अवैध कॉलोनियों में दमकल की छोटी या बड़ी गाड़ियां नहीं जा सकतीं, वहां रिमोट कंट्रोल डिवाइस से आसानी से प्रवेश कर अपना काम कर लेगा। इन अल्ट्रा मॉडर्न डिवाइस में थर्मल इमेजिंग कैमरे की मदद से किसी भी बिल्डिंग के भीतर तक आसानी से देखा जा सकता है।

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