इस वोटर का नाम है सोलेका तायांग और उम्र है 39 साल. वह अरुणाचल प्रदेश के एक दूर दराज के इलाके में रहती हैं. उनका गांव चीन की सीमा के बिल्कुल पास है. सोलेका भी अपना वोट डाल पाएं, इसके लिए चुनाव कर्मियों की एक टीम लंबा सफर करके उनके गांव में जाएगी.

एक स्थानीय चुनाव अधिकारी दागबोम रीगा ने बताया कि 15 से 18 चुनाव कर्मियों की टीम को सोलेका के गांव तक पहुंचने के लिए मुश्किल रास्तों पर लगभग छह किलोमीटर पैदल चलना होगा. वह कहते हैं, “हम एक एक वोटर तक पहुंचना चाहते हैं, इसलिए हमारे लिए यह कोई चुनौती वाली बात नहीं है.” अलजा जिले में बनने वाले इस अनोखे मतदान केंद्र पर भले ही सोलेका अकेली वोटर हों. लेकिन नियमों के हिसाब से मतदान केंद्र को सुबह से लेकर शाम तक खुला रहना होगा.

रिबा कहते हैं, “भले ही वह अपना वोट सवेरे ही डाल दें, लेकिन चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान केंद्र शाम पांच बजे तक खुला रहेगा.” चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि किसी भी वोटर से उसका मतदान केंद्र दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर नहीं होना चाहिए.

2014 में इस जगह पर दो वोटर हुआ करते थे, जिनमें सोलेका के अलावा उनके पति का भी नाम था. लेकिन इस बार उन्होंने अपने आपको अन्य जगह पर रजिस्ट्रर करा लिया, जिससे अब वहां सिर्फ सोलेका अकेली वोटर बची हैं.

अरुणाचल प्रदेश में कई ऐसी जगहें हैं जहां पर गिने चुने वोटर हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक इस पूर्वोत्तर राज्य में कम से कम आठ मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां वोटरों की संख्या 10 से कम है. भारत जैसे विशाल देश में चुनाव प्रक्रिया किसी चुनौती से कम नहीं है. राजस्थान जैसे राज्य के रेगिस्तानों इलाकों में जाने के लिए चुनाव कर्मियों को ऊंटों की सवारी करनी पड़ती है, तो ठंडे इलाकों में उन्हें याकों का सहारा लेना पड़ता है. कई जगहों पर नौका के जरिए ही पहुंचा जा सकता है.

भारत में 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरणों में आम चुनाव होंगे, जिनमें कुल 90 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं. वोटों की गिनती 23 मई को होगी.

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