बीजेपी के सीनियर लीडर और गोवा के सीएम रह चुके मनोहर पर्रिकर का 17 मार्च 2019 को निधन हो गया। उनकी मौत का कारण बना पैंक्रियाटिक कैंसर। दिवंगत पर्रिकर लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित थे। सिर्फ पर्रिकर ही नहीं इससे पहले स्टीव जॉब्स औऱ नरगिसस दत्त जैसी मशहूर हस्तियां भी इस कैंसर का शिकार बन चुकी हैं। दरअसल इस तरह के कैंसर के साथ जो बड़ी समस्या है वो ये है कि इसके लक्षण सुरुआती दौर में पता नहीं चलते। जब पता चलता है तब तक बात काफी बिगड़ चुकी होती है।

पैंक्रियाज यानि अग्नाशय में ऐसी ग्रंथियां मौजूद होती हैं जो हमारे शरीर के लिए जरूरी पैंक्रियाटिक जूस, हार्मोन और इंसुलिन बनाती हैं। कैंसर पैंक्रियाज के एक्सोक्राइन और एंडोक्राइन हिस्से में पनपता है। एक्सोक्राइन कैंसर पैन्क्रियाटिक ग्लैंड के अंदर होता है वहीं एंडोक्राइन ट्यूमर उस हिस्से में होता है जो शरीर के लिए हार्मोन प्रड्यूस करता है। यह कैंसर ज्यादातर 60 साल से आधिक उम्र वालों को अपना शिकार बनाता है। ज्यादातर ऐसे लोग पैंक्रियाटिक कैंसर के शिकार होते हैं जो ज्यादा धूम्रपान करते हैं। अधिक धूम्रपान करने वालों में अग्‍नाशय कैंसर के होने का खतरा दो से तीन गुने तक बढ़ जाता है। रेड मीट और चर्बीयुक्‍त डाइट से भी इस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

  • पैंक्रियाटिक कैंसर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये है किइसके लक्षण शुरुआती स्टेज में नहीं दिखते हैं। इसके जो लक्षण दिखते भी हैं वो दूसरी बीमारियों से मिलते जुलते हैं। इस बीमारी का सबसे बड़ा नुकसान यही है कि जब तक ये बीमारी पकड़ में आती है तब तक वह काफी भयावह रूप ले चुकी होती है। इसीलिए नीचे दिए गए लक्षण से अगर आप ज्यादा समय तक या
    अकसर ग्रसित रहते हैं तो एक बार पैंक्रियाटिक कैंसर की जांच जरूर करवाएं

  • भूख न लगना
  • जी मिचलाना
  • पीलिया
  • पेल या ग्रे मल
  • हाई ब्लड शुगर
  • कमजोरी महसूस होना
  • वजन घटना
  • स्किन, आंख और यूरिन का रंग पीला हो जाना
  • पेट के ऊपरी भाग में दर्द रहना

    उपचार :
    पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज सर्जरी या के जरिए होता है। इलाज के ये चार तरीके अपनाए जैते हैं-

विपल प्रॉसेस : इलाज की इस प्रक्रिया में पैंक्रियाज, स्मॉल इंटेस्टाइन और गॉल ब्लैडर के छोटे हिस्से को निकाल दिया जाता है।

डिसटल पैंक्रियाटेक्टमी : इस प्रक्रिया में अग्नाशय के लंबे वाले हिस्से जिसे टेल भी कहा जाता है उसे निकाल दिया जाता है।

टोटल पैंक्रियाटेक्टमी : ये प्रक्रिया बेहद रेयर केस में अपनाई जाती है। इसमें अग्नाशय के साथ ही ऐब्डमन का ऊपरी हिस्सा को काटकर हटा दिया जाता है।

कीमोथेरपी : पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए कीमोथेरपी या इसके साथ रेडियोथेरपी का इस्तेमाल किया जाता है। इलाज की इस पद्धति में सर्जरी भी की जाती है।

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