लखनऊ : आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के 2 दर्जन से ज्यादा भाजपा सांसदों के टिकट कटने की चर्चा है जिनमे से एक नाम उन्नाव जिले से भाजपा सासंद डॉ। सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज का भी है।

साक्षी महाराज ने मंगलवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को पत्र लिखकर 2019 में एक फिर टिकट मांगते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कोई और निर्णय लेती है तो इससे कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होगी। इसके लिए उन्होंने उन्नाव लोक सभा सीट का जातीय समीकरण भी हवाला दिया है। साक्षी महराज ने कहा कि मैंने पार्टी को खड़ा किया है, जिसके पीछे मेहनत और पैसा लगाकर पूरे इलाके में सेवा की है। उन्होंने ये भी लिखा है कि उन्हें छोड़कर क्षेत्र में कोई भी पार्टी का ओबीसी प्रतिनिधत्व नहीं करता है और पार्टी पर ओबीसी की उपेक्षा का भी आरोप लगता है।

‘नहीं मिला टिकट तो परिणाम सुखद नहीं रहेगा’

साक्षी महाराज ने इशारों में कहा कि अगर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो पार्टी पर ओबीसी की उपेक्षा का जो आरोप लगता है वह सही साबित होगा। उन्होंने लिखा कि उनके अलावा ओबीसी का कोई प्रतिनिधित्व जनपद में है ही नहीं।

उन्होंने लिखा है कि जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष ठाकुर, बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह ठाकुर, पुरवा से भी बीजेपी विधायक अनिल सिंह ठाकुर, एमएलसी राजबहादुर चंदेल ठाकुर, ह्रदय नारायण दीक्षित विधानसभा अध्यक्ष ब्राह्मण, अरुण कुमार पाठक एमएलसी ब्राह्मण, पंकज गुप्ता सदर विधायक वैश्य, मोहान विधायक ब्रजेश रावत पासी और सफीपुर विधायक बंबालाल दिवाकर धोबी हैं। ‘अगर पार्टी ने मुझे लोकसभा में यहां से टिकट नहीं दिया तो प्रदेश देश के करोड़ों कार्यकर्ताओं के आहत होने की पूरी संभावना है, जिसका परिणाम सुखद नहीं होगा।’

2014 में सपा थी रनर

उन्नाव संसदीय लोकसभा सीट से 2014 में साक्षी महाराज ने मोदी लहर में तीन लाख पंद्रह हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। लोकसभा में कांग्रेस और बीएसपी की जमानत जब्त हुई थी। एसपी दूसरे नंबर पर रही थी। इस बार बीएसपी-एसपी के गठबंधन में यह सीट एसपी के खाते में गई है। एसपी की ओर से पार्टी के कद्दावर नेता अरुण कुमार शुक्ला या अन्य किसी ब्राह्मण के लड़ने की पूरी संभावना है।

क्या है जातिगत समीकरण

साक्षी महाराज ने अपने पत्र उन्नाव संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरण का हवाला दिया है उसमें लोधी, कहार, निषाद, कश्यप, मल्लाह के पांच लाख वोट हैं, अन्य पिछड़ा वर्ग के पांच लाख वोटर हैं। ब्राह्मण के एक लाख नब्बे हजार, क्षत्रीय के एक लाख पचास हजार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छह लाख पचास हजार, मुस्लिम वोटर एक लाख बीस हजार और अन्य सवर्ण वोटर पचास हजार हैं।

आपको बता दें कि उन्नाव सीट मध्य उत्तर प्रदेश की सीट है। जो लखनऊ, कानपुर के राजनीतिक मिजाज से भी प्रभावित होती। पिछली बार मोदी लहर में साक्षी महाराज को बड़ी जीत मिली थी। उनको 43 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी को मात्र 17।37 फीसदी वोट मिले। आजादी के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस लगातार 6 बार इस सीट से जीतती रही और कुल 9 बार यह सीट उसके खाते में जा चुकी है।

कहा था भाजपा से करेंगे बागवत

पार्टी के आन्तरिक सर्वे में साक्षी महाराज की ग्राउंड रिपोर्ट में माइनस मार्क हैं। यही वजह है कि इस बार उनका टिकट कटने की चर्चाये जोरों पर हैं। साक्षी महाराज हमेशा ही अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने बीते दिनों कहा था कि 2019 से पहले अगर राम मंदिर का निर्माण नहीं होता है तो वह बीजेपी के साथ बगावत करेंगे। लेकिन अब साक्षी महाराज बीजेपी से टिकट के लिए गिडगिडा रहे हैं उन्हें ये साफ कर देना चाहिए कि उनके लिए सांसदी जरूरी है या राममंदिर।

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