न्यूयॉर्क: सीरिया में शुक्रवार शाम को अमेरिका और उनके साथी देशों की ‘आक्रमक’ कार्रवाई के खिलाफ रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक प्रस्ताव पेश किया, जो एक ही झटके में खारिज हो गया। रूस ने शनिवार को पेश किए इस प्रस्ताव में अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन के खिलाफ सीरिया में मिलिट्री एक्शन की निंदा करना और भविष्य में इस प्रकार की होने वाली घटना को रोकना था। सीरिया में हुए केमिकल अटैक के बाद अमेरिका-ब्रिटेन-फ्रांस की आक्रमक कार्रवाई के खिलाफ रूस ने यूएनएससी को तत्काल मीटिंग बुलाने के लिए कहा था।

यूएनएससी में रूस के प्रस्ताव पर हुई मीटिंग में अमेरिका, यूके, फ्रांस, नीदरलैंड, स्वीडन, कुवैत, पोलैंड और आईवरी कोस्ट ने रूस के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। सीरिया में 7 अप्रैल को हुए केमिकल अटैक के बाद पिछले एक सप्ताह में यूएन में यह 5वीं मीटिंग थी। मीटिंग में यूएस, यूके और फ्रांस ने कहा कि उन्होंने सीरिया में केमिकल साइट को निशाना बनाया गया था, जिसे बशर-अल-असद अपने नागरिकों के खिलाफ होने दे रहे हैं। इस वोटिंग में रूस का साथ सिर्फ चीन और बोलिविया का ही मिला।

निकी हेली ने एक बार फिर दी चेतावनी 

सीरिया में अटैक के बाद बुलाई मीटिंग में यूएन में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने एक बार फिर रूस और असद सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो यूएस और उसके सहयोगी देश फिर से हमला करेंगे। हेली ने कहा कि अमेरिका केमिकल वेपन्स का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होने देगा। वहीं, यूएन में रूस के राजदूत केरेन नाबेंजिया ने कहा कि सीरिया पर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का अटैक दुनिया के लिए, यूएन और उसके चार्टर के लिए बहुत ही दुखद दिन है, जिन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया है। नाबेंजिया ने कहा कि आज से बुरा दिन कभी नहीं था।

सीरिया हमला में बढ़ेंगी मोदी सरकार की मुश्किलें

सीरिया पर अमेरिका के हमले से भारत को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है क्योंकि भारत में पहले से ही तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। देश में कई राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं। साथ ही अगले साल आम चुनावों की तैयारी में लगी सरकार को इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है। भारत में पिछले एक महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा था।

इंटरनेशनल ऑइल एजेंसी (आईईए) ने भी एक बयान में कहा है कि तेल की सप्लाई में कमी आने से बाजार में इसकी कीमत बढ़ेंगी। तेल जगत में पिछले 10 दिनों से आशंका बनी हुई थी कि अमेरिका कभी भी सीरिया पर कार्रवाई कर सकता है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा था।

इस संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट्स आते ही उनका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा था। अब सीरिया पर सैन्य कार्रवाई हो चुकी है तो बाजार में तेल का दाम भी ऊपर चला गया है। इसमें प्रति बैरल 5 डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।

भारत की नरेंद्र मोदी सरकार इस संबंध में भाग्यशाली रही कि उसके सत्ता संभालने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बहुत कम थीं और 2015 में एक समय तो वह 40 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गईं।

इसके बाद लंबे समय तक कच्चे तेल के दाम स्थिर रहे और इससे केंद्र सरकार को अपना राजकोषीय घाटा पाटने और महंगाई पर काबू करने में खासी मदद मिली।

अब मध्य पूर्व में नई राजनीतिक स्थितियों से तेल के दाम बढ़ेंगे तो कई मोर्चों पर पहले ही चुनौतियों का सामना कर रही भारत सरकार के लिए यह सुखद स्थिति नहीं होगी। खास तौर पर इस साल होने वाले विधानसभा और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।

सीरिया पर अमेरिका और पश्चिमी देशों के ये हमले भारत में तेल की कीमतों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, इस पर और ज्यादा जानकारी के लिए बीबीसी संवाददाता विभुराज ने बात की एनर्जी एक्सपर्ट और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नरेंद्र तनेजा से…

सीरिया पर निर्भर करेंगी कीमतें

सऊदी अरब, इराक, ईरान, ओमान और यूएई में जो होता है, उसका भूराजनीतिक असर होता है। मध्यपूर्व के घटनाक्रम का तेल की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ता है।

इराक और कतर में अमेरिका की तेल से जुड़ी परिसंपत्तियां हैं। देखना होगा कि सीरिया वहां हमला करता है या नहीं। सीरिया की जवाबी कार्रवाई पर और रूस के अगले क़दम पर निर्भर करेगा कि तेल की कीमतें आगे कहां जाएंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here