उज्जैन। सोमवार को कार्तिक मास में महाकाल की दूसरी सवारी निकली। राजाधिराज महाकाल रजत पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। भगवान के मनमहेश रूप ने दर्शन के लिए उमड़े प्रजाजनों का मन मोह लिया। 5 किमी लंबे सवारी मार्ग पर 4 घंटे भक्ति का उल्लास छाया रहा।

दोपहर 3.30 बजे मंदिर के सभा मंडप में कलेक्टर मनीषसिंह ने भगवान मनमहेश का पूजन किया। पश्चात सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी ने अवंतिकानाथ को सलामी दी। इसके बाद कारवां शिप्रा तट की ओर रवाना हुआ।

सवारी में सबसे आगे कड़ाबीन दस्ता तोप चलाकर भक्तों को पालकी आने की सूचना दे रहा था। पीछे अश्वारोही पुलिस का दल, सशस्त्र बल की टुकड़ी तथा पुलिस बैंड चल रहा था। गुलाब, जरबेरा तथा बिजली के सफेद फूलों से सजी पालकी में राजाधिराज विराजित थे। जिस मार्ग से भी पालकी गुजरी जय महाकाल के घोष से गगन गुंजायमान हो गया। महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामानुजकोट होते हुए पालकी शाम करीब 5 बजे रामघाट पहुंची।

यहां महाकाल पेढ़ी पर पुजारियों ने भगवान महाकाल का शिप्रा के जल से अभिषेक कर पूजा अर्चना की। भगवान की ओर से तीर्थ का पूजन भी किया गया। पूजन पश्चात सवारी गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए पुन: महाकाल मंदिर पहुंची। इसके बाद संध्या आरती हुई।

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