UIDAI या भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण ने लोगों से अपनी 12 अंकों वाली आधार संख्या इंटरनेट या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने या अन्य को किसी प्रकार की चुनौती देने से मना कर दिया है। यह बात यूआईडीएआई ने दूरसंचार नियामक ट्राई प्रमुख के आधार को सार्वजनिक करने और नुकसान पहुंचाने की चुनौती के देने के बाद कही है। आपको बता दें कि ट्राई प्रमुख आरएस शर्मा की इस चुनौती के बाद सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी कई निजी जानकारियों को साझा किया गया और उनको ट्रोल भी किया गया।

कानून के विरुद्ध
UIDAI ने अपने एक बयान में कहा है कि इस प्रकार की चीजें अनावश्‍यक हैं और इससे बचा जाना चाहिए क्‍योंकि यह कानून के अनुरूप नहीं है। शनिवार को आरएस शर्मा ने अपनी आधार संख्‍या को सार्वजनिक करते हुए यह चुनौती दी थी कि कोई यह बताए कि इस संख्‍या को जानकार कैसे वह उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकता है। उसके तुरंत बाद ही ट्विटर पर कुछ लोगों ने दावा किया की आधार नंबर के माध्‍यम से शर्मा का बैंक खाता और ई-मेल मिल गया है। जबकि शर्मा ने इससे इनकार किया और इसे गलत बताया।

बिना सहमति के 1 रुपए जमा करने का भी दावा
इसके अलावा हैकर्स ने यह भी दावा किया कि उनके बैंक अकाउंट का नंबर समेत अन्‍य पांच बैंक खातों का IFCs कोड भी प्राप्‍त कर लिया है। इनमें से कुछ हैकर्स ने उनके अकाउंट में 1 रुपए जमा कराने का दावा करते हुए कहा है कि बिना उनकी सहमति के ही पैसा उनके अकाउंट में जमा कराया जा सकता है और पैसा भेजकर उनके ब्‍लैकमेल किया जा सकता है।

होगी अपराधिक कार्रवाई
इस पर UIDAI ने कहा कि लोगों को सार्वजनिक रूप से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आधार संख्‍या नहीं डालनी चाहिए और ना ही अन्‍य को इसे लेकर कोई चुनौती देनी चाहिए। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि किसी अन्‍य की आधार संख्‍या पर आधार सत्‍यापन या किसी भी उद्देश्‍य से अन्‍य के आधार का उपयोग धोखाधड़ी माना जाएगा और आधार कानून एवं भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत अपराधिक कार्रवाई माना जाएगा। अगर कोई व्‍यक्ति ऐसा करता है या दूसरे को ऐसा करने के लिए उकसाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसलिए लोगों को ऐसी चीजों से दूर रहना चाहिए।वैद्य जरुरतों के लिए साझा करें ये डिटेल
आधार को गंभीरता से लेते हुए यूआईडीआई ने कहा कि 12 अंकों वाली आधार संख्या व्यक्तिगत रूप से संवेदनशील सूचना है। यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि बैंक खाता संख्‍या, पासपोर्ट संख्‍या और पैन नंबर, जिसको सिर्फ वैद्य जरुरतों के लिए ही साझा किया जाना चाहिए।

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