भारत में वैसे तो कई ऐतिहासिक जेल हैं, लेकिन एक ऐसी जेल भी है जो करीब 472 साल पुरानी है. इस जेल की सबसे ख़ास बात ये है कि इसमें सिर्फ़ एक क़ैदी रहता है. ये जेल आम जेल की तरह नहीं, बल्कि किसी ऐतिहासिक किले की तरह है जो समंदर के बीच में स्थित है.

ये जेल भारत के केंद्र शासित प्रदेश दीव में स्थित है. इसे दीव फ़ोर्ट जेल भी कहा जाता है जो अपनी भव्यता के लिए पर्यटकों के आकर्षण का मुख़्य केंद्र है. ये जेल किसी जमाने में पुर्तगाली कॉलोनी के अंतर्गत आती थी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लंबे समय से इस जेल को टूरिस्‍ट डेस्‍ट‍िनेशन बनाने की कवायद में जुटा हुआ है. साल 2013 में इस जेल को बंद करने की घोषणा की गई थी.

इस किले नुमा जेल में 30 साल का दीपक कांजी पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहा है. जिसे साल 2017 में पत्नी को जहर देकर मारने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. दीपक यहां ज़्यादा दिन तक नहीं रहने वाला. अगले ट्रायल के बाद उसे भी किसी दूसरी जेल में शिफ़्ट कर दिया जाएगा. क्योंकि सरकार को इसके लिए काफ़ी पैसा खर्च करना पड़ रहा है.

इस जेल में एकमात्र कैदी होने के कारण दीपक कांजी की सुरक्षा में 5 सिपाही और 1 जेलर की तैनाती की गई है. ये सभी कर्मचारी शिफ़्ट में ड्यूटी करते हैं. इसका मतलब ये कि एक समय में इस जेल में दो या तीन लोग ही रहते हैं. कुछ साल पहले तक इस जेल में कुल 7 कैदी बंद थे, जिनमें से 2 महिलाएं भी थीं. इनमें से 4 क़ैदियों को गुजरात की अमरेली जेल में शिफ़्ट कर दिया गया, जबकि 2 क़ैदियों की सजा पूरी हो गई. अब दीपक कांजी ही एकमात्र क़ैदी बचे हुए हैं.

दीपक की इस जेल में ख़ूब ख़ातिरदारी भी होती है. एकमात्र क़ैदी होने के चलते उसके लिए खाना पास के एक रेस्टोरेंट से मंगाया जाता है. जेल में दीपक को दूरदर्शन और दूसरे आध्यात्मिक चैनल देखने की अनुमति भी है. साथ ही उसे गुजराती अख़बार और मैगज़ीन्स भी दी जाती हैं. इसके अलावा शाम 4 बजे से 6 बजे तक के बीच वो दो सिपाहियों के साथ खुली हवा में टहल भी सकता है.

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