लखनऊ : देश के सबसे बड़े सूबे की राजधानी में लोकसभा का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा का गढ़ रही इस सीट पर केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह मैदान में हैं तो उनके मुकाबले के लिए महागठबंधन की ओर से भाजपा के बागी और अब कांग्रेसी नेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को लाया गया है। पूनम समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी लेकिन इसी बीच कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोलकर सबको हैरत में डाल दिया है।

आपको बता दें कि कांग्रेस ने इस सीट से धार्मिक नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम को टिकट दिया है। लखनऊ लोकसभा सीट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भी राजनीतिक कर्मभूमि रही है।
राजनाथ को मिल सकता है फायदा शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मंगलवार को ही औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी में शामिल हुई हैं। वे कल यानी 18 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल करेंगी लेकिन कांग्रेस के इस सीट पर प्रत्याशी घोषित करने से स्थिति त्रिकोणीय मुकाबले की बन गयी है।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य द्विवेदी के मुताबिक इसका फायदा राजनाथ सिंह को मिल सकता है। क्योंकि इससे पहले समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से लखनऊ सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की अपील की थी। समाजवादी पार्टी की ओर से कहा गया था कि पूनम सिन्हा एसपी-बीएसपी-RLD गठबंधन से लखनऊ की प्रत्याशी होंगी। हम कांग्रेस से अपील करते हैं कि वे इस सीट से अपना प्रत्याशी न उतारें, ताकी हम इस सीट पर बीजेपी को मात दे सकें।

1991 से इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा

राजनाथ के खिलाफ सपा से पूनम सिन्हा और कांग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लखनऊ की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि तीनों ही मुख्य राजनीतिक दल के उम्मीदवार लखनऊ से बाहर के हैं।

यहां पर 1991 से लगातार बीजेपी का कब्जा है। सपा और बसपा इस सीट पर आज तक अपना खाता भी नहीं खोल सकी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी ने लखनऊ संसदीय सीट पर 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 तक लगातार जीत दर्ज की थी। वाजपेयी को लखनऊ में न तो राजबब्बर मात दे सके, न ही मुजफ्फर अली और न ही राजा कर्ण सिंह। 2009 में बीजेपी से लाल जी टंडन ने इस सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वाजपेयी के तर्ज पर ही राजनीतिक समीकरण को साधकर राजनाथ सिंह ने 2014 के सियासी जंग को फतह किया था और कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी को करीब पौने तीन लाख वोटों से मात दी थी जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गयीं।कायस्थ मतदातों की वजह से सपा ने खेला पूनम पर दांव

सपा ने कायस्थ मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए पूनम सिन्हा पर दांव खेला है. पूनम सिन्हा बिहार की पटना की रहने वाली हैं और मुंबई में रह रही हैं। वहीं, कांग्रेस ने ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण के जरिए राजनाथ को मात देने के लिए संभाल के कल्कि पीठ के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम पर भरोसा जताया है। लेकिन बीजेपी के दुर्ग को भेदना विपक्ष के लिए इतना ही आसान नहीं है। प्रमोद कृष्णम यूपी के संभल के रहने वाले हैं।

लखनऊ का राजनीतिक समीकरण

लखनऊ लोकसभा सीट के राजनीतिक समीकरण को देखें तो बड़ी आबादी मुस्लिम समुदाय की है। मुस्लिम 20 फीसदी, अनुसूचित जाति 14।5 फीसदी, ब्राह्मण 8 फीसदी, राजपूत 7 फीसदी, ओबीसी 28 फीसदी, वैश्य 10 और अन्य 12 फीसदी मतदाता हैं। लखनऊ संसदीय सीट पर पांच विधानसभा सीटें हैं और मौजूदा समय में सभी पर बीजेपी का कब्जा है।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य द्विवेदी बताते हैं कि राजनाथ सिंह को टक्कर देने के लिए सपा ने शत्रुघ्न सिन्हा के स्टारडम को कैश कराने के लिए उनकी पत्नी पूनम सिन्हा को उतारा है।

पूनम सिन्हा के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी लखनऊ के कायस्थ मतदाताओं के दिल जीतने की होगी, जो मौजूदा समय में बीजेपी के परंपरागत वोटर हैं। लेकिन पूनम सिन्हा के लिए लखनऊ की सीट नई है साथ ही उन्हें व्यक्तिगत तौर पर भी राजनीती का कोई अनुभव नही है ऐसे में उन्हें जमीनी स्तर कई कठिनाईयों से जूझना पड़ सकता है। इसके अलावा सपा और बसपा इस सीट पर कभी भी जीत नहीं सकी है। ऐसे में इस सीट पर सपा के खाता खोलने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वहीं दूसरी ओर आचार्य प्रमोद कृष्णम 2014 में संभल सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे थे हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी लेकिन मुसलमानों के बीच उनकी काफी अच्छी छवि है इसके चलते लखनऊ संसदीय सीट पर कांग्रेस ने उन्हें उतारा है। ऐसे में मुस्लिम मतों का बंटवारा महागठबंधन और कांग्रेस के बीच होना तय है जिसका सीधा फायदा राजनाथ सिंह को मिल सकता है।

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