नई दिल्ली : दुनिया में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम असर दिखा रही है. दुनिया के कई देशों ने भी पाकिस्तान से कारोबारी संबंध खत्म करने का इशारा दिया है. पुलवामा हमले के बाद भारत पहले ही पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन की सूची से बाहर कर चुका है. अब खबर है कि आतंकियों को फंडिंग करने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शामिल होने के चलते पाकिस्तान को “डर्टी मनी ब्लैकलिस्ट” सूची में डाला गया है. यूरोपियन देशों के संगठन यूरोपियन यूनियन ने पाकिस्तान को इस सूची में डाला है. इस सूची में पहले से भी कई देश मौजूद हैं. इस सूची में शामिल किए गए देशों की संख्या अब 23 हो गई है.

नहीं रहेंगे कारोबारी संबंध

यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों के बैंकों को चूना लगाने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और आतंकियों को आर्थिक मदद के आरोपों में यूरोपियन यूनियन कमीशन ने सऊदी अरब और पाकिस्तान समेत एक दर्जन देशों को ब्लैकलिस्ट किया है. अमेरिका के भी चार क्षेत्र शामिल किए गए हैं. ईयू ऐसे देशों को खतरा मानता है. यूरोपियन कमीशन की ‘डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट’ नेशंस की सूची में जिन्हें डाला जाता है, उनके साथ यूरोपीय देश कारोबारी संबंध खत्म कर देते हैं. हालांकि, इस फैसले का ईयू के ही कुछ देशों ने विरोध किया है. ब्रिटेन भी लिस्ट में शामिल देशों के साथ इकोनॉमिक संबंधों को लेकर चिंतित है.

कौन-कौन है डर्टी लिस्ट में शामिल

ईयू की इस डर्टी लिस्ट में अफगानिस्तान, दक्षिण कोरिया, इथियोपिया, ईरान, पाकिस्तान, श्रीलंका, सीरिया, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, ट्यूनीशिया और यमन भी शुमार है. इसके अलावा लीबिया, बोत्सवाना, घाना और बहामास को भी शामिल किया गया है.

पाकिस्तान पर क्या होगा असर

यूरोपीय देश इस लिस्ट में शामिल देशों के साथ कारोबारी रिश्तों को खत्म कर देते हैं. वहीं, इन देशों पर कई और सख्त कदम उठाए जाते है. ऐसे में पाकिस्तानी कारोबारियों को कारोबार करने में कई परेशानियां उठानी पड़ेंगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि उन्हें आसानी से कर्ज नहीं मिलेगा. उनके लिए बिजनेस करना अब और मुश्किल भरा हो जाएगा.

दो माह में आएगी रिपोर्ट

हालांकि, लिस्ट पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है. ईयू कमीश्नर वेरा जुरोवा ने इसे प्रस्तावित किया है. 28 सदस्य देशों वाली ईयू इस सूची को मेजॉरिटी वोट से रिजेक्ट भी कर सकती है. इसके लिए उनके पास अधिकतम दो महीने का समय है. हालांकि ईयू कमीश्नर वेरा जुरोवा का मानना है कि डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट से सभी सदस्य देश सहमत होंगे क्योंकि बैंकिंग सेक्टर को मनी लांड्रिंग से खतरा बढ़ रहा है.

अधिकतम 2 माह में लिस्ट पर फैसला

यह सूची अभी पास नहीं हुई है. इसे EU Commissioner वेरा जुरोवा ने प्रस्तावित किया है. 28 सदस्य देशों वाली ईयू इस सूची को मेजॉरिटी वोट से रिजेक्ट कर सकती है. इसके लिए उनके पास अधिकतम दो महीने का समय है. हालांकि वेरा जुरोवा का मानना है कि डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट से सभी सदस्य देश सहमत होंगे क्योंकि बैंकिंग सेक्टर को मनी लांड्रिंग से खतरा बढ़ रहा है.

नाराज हुआ अमेरिका

यूएस ट्रेजरी ने इस लिस्टिंग प्रॉसेस को गलत बताया और अमेरिका के चार टेरिटरी को भी इस सूची में डालने को खारिज कर दिया. सूची में अमेरिकन समोआ, यूएस वर्जिन आइसलैंड, प्यूर्टोरिको और गुआम को रखा गया है.

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