नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को दिए गए 10 फीसदी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने इसको लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार किया.

सोशल एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया है. गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले को खारिज करने के लिए पहले भी कुछ एनजीओ द्वारा याचिकाएं दायर की गई थीं. हालांकि, याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तुरंत प्रभाव से फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया था.

आपको बता दें कि पिछली याचिकाओं की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना ने की थी. और मामले पर त्वरित फैसले से इनकार किया था.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने संविधान में संशोधन कर गरीब सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने की बात कही है. ये आरक्षण शिक्षा और सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में मिलेगा. सरकार का कहना है कि इस आरक्षण से एससी-एसटी-ओबीसी को मिलने वाले आरक्षण से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

आपको बता दें कि संविधान संशोधन का ये बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास हो चुका है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इस बिल को कानून बनाने की मंजूरी दे दी है. मोदी सरकार के इस फैसले को लोकसभा चुनाव से पहले मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है. केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ राज्यों में ये लागू भी हो गया है.

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