नवरात्रि के आठवां दिन को अष्टमी कहा जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी एक ही दिन यानी 13 अप्रैल को है। इस दिन कन्या पूजन के साथ- साथ हवन किया जाता है। वहीं, कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं।

13 अप्रैल को सूर्योदय 05:43 पर अष्टमी शुरू होगी। अष्टमी सुबह 08 :19 तक चलेगी। भगवान राम का जन्म नवमी तिथि को कर्क लग्न तथा कर्क राशि में हुआ था। इसके अलावा कन्‍या पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:41 से 08:13 बजे तक है।

अगला मुहूर्त इसके बाद दिन 11:56 बजे से 12:47 बजे तक चलेगा। तीसरा मुहूर्त दिन में 02:28 बजे से 03:19 बजे तक चलेगा। अष्टमी और नवमी के दिन घर में नौ कन्‍याओं को पूरी और हलवे के प्रसाद का भोग लगाएं। और फिर उनका पैर छू कर आशीर्वाद लें।

दो दिन होगी राम नवमी

राम नवमी इस साल दो दिन मनाई जाएगी। रामनवमी शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनायी जाती है और इस विशेष दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की विधि विधान से पूजा की जाती है।

13 अप्रैल को सुबह 8:13 बजे के बाद से नवमी शुरू हो जाएगी। नवमी का मुहूर्त अगले दिन 14 अप्रैल को सुबह 06:04 बजे तक है। ऐसे में रामनवमी इस बार दो दिन तक रहेगी। 9 दिन व्रत रखने वाले 14 अप्रैल को पारण करेंगे।

दुर्गा अष्टमी पूजा विधि

  • महा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  • फिर देवी दुर्गा की प्रतिमा को अच्छे वस्त्रों से सुसज्जित करें।
  • फिर उनकी प्रतिमा के सामने लाल पुष्प अर्पित करें।
  • फिर कपूर, दीया, धूपबत्ती प्रज्वलित कर के आरती के साथ माता दुर्गा की पूजा करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और दुर्गा के मंत्रोच्चार करें।
  • मां को मिष्ठान्न अर्पित कर उनके नामों का उच्चारण करें।
  • दुर्गा जी को पंचामृत अर्पित करें। इसके साथ उन्‍हें पांच फल, किशमिश, सुपारी, पान, लौंग, इलायची आदि अर्पित करें।
  • आखिर में घी के दिये से मां की आरती करें।

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