वॉशिंगटन। एचआईवी, दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। दरअसल, इन बीमारियों से मरने की आशंका अधिक होती है। मगर, आपको यह जानकर हैरानी होगी इन बीमारियों से जितने लोगों की मौत नहीं होती है, उससे ज्यादा मौतें आलस की वजह से होती हैं।

आजकल की जीवनशैली और तकनीक ने लोगों को आलसी बना दिया है। आलस की वजह से दुनियाभर में लाखों लोगों की जान चली जाती है। आपको जानकर हैरत होगी कि इसकी गिनती एचआइवी की वजह से मरने वालों से कहीं अधिक है। ऐसे लोगों का जीवन डायबिटीज, दिल के रोगियों एवं धूम्रपान करने वालों के मुकाबले ज्यादा जोखिमभरा है।यह बात एक शोध में सामने आई है कि जो लोग ज्‍यादा समय बैठे रहने में बिताते हैं उन्‍हें सक्रिय लोगों की तुलना में जान का खतरा ज्यादा होता है। जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खराब आदतों और गंभीर बीमारियों से ज्यादा लोगों की मौत आलस की वजह से होती है। साल 1991 से लेकर साल 2014 के बीच एक लाख 22 हजार 007 लोगों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने स्वयंसेवकों की मृत्यु दर, उनकी बीमारी के इतिहास और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की जांच की।

अध्ययन के प्रमुख लेखक वेल जैबर ने कहा कि जिन लोगों ने कोई खेल नहीं खेला, उनके सक्रिय लोगों की तुलना में मरने का जोखिम 500 फीसद अधिक था। यह स्मोकिंग, डायबिटीज, दिल की बीमारियों या लास्ट स्टेज की गंभीर बीमारियों से मरने वाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक था।

इस आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि आलसीपन किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए खराब है। वहीं, नियमित रूप से व्यायाम करते रहने से आयु बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता दोनों ही बढ़ती है।अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक अपर्याप्त शारीरिक गतिविधियों की वजह से पूरी दुनिया में 1.4 अरब लोगों की जिंदगी खतरे में है। दुनिया में हर तीन में से एक महिला और हर चार में से एक पुरुष इस समस्या से ग्रस्त है। दुखद यह है कि तमाम गंभीर रोगों में साल-दर साल सुधार दिखा है, लेकिन यह रोग लाइलाज होता जा रहा है। 2001 से इस प्रवृत्ति में कोई सुधार नहीं दिखा है। भारत में 25 फीसद पुरुष और 50 फीसद महिलाएं इसी श्रेणी में आते हैं।

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