नई दिल्ली : स्कूल में आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल न करने की नीति में बदलाव से जुड़े एक अहम विधेयक को गुरुवार को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी. निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक 2017 लोकसभा में पिछले साल ही पारित हो गया था. सरकार ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए इसे जरूरी बताया है.

‘अभिभावकों की मांग पर उठाया गया कदम’

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह कदम अभिभावकों की मांग पर ही उठाया जा रहा है. हालांकि पास होने के लिए बच्चों को एक मौका और भी दिया जाएगा. इसके लिए मुख्य परीक्षा के दो महीने के भीतर ही फिर परीक्षा ली जाएगी.

विधेयक की जरूरत की चर्चा करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि 5वीं कक्षा के छात्रों को तीसरी कक्षा का गणित भी नहीं आता. ऐसे में व्यवस्था में बदलाव की बात की जा रही थी.

कारगर साबित नहीं हो रही थी ये नीति

केंद्र का कहना है कि आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की नीति कारगर साबित नहीं हो रही. उसके मुताबिक इससे शिक्षा की मजूबत बुनियाद नहीं पड़ रही और इन बच्चों की एक बड़ी संख्या नौवीं में फेल होने लगी है.

ये राज्य कर रहे है विरोध

सरकार की मानें तो 25 राज्य इस पर सहमत हैं. सिर्फ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और तमिलनाडु इसका विरोध कर रहे हैं. इसे देखते हुए विधेयक में केंद्र सरकार ने उनका फैसला उन पर ही छोड़ दिया है.

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