नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की मीटिंग में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए इसरो के मिशन गगनयान के लिए 10 हजार करोड़ रुपए को मंजूरी दे दी है. इस मिशन के तहत 3 भारतीय अंतरिक्ष में सात दिन गुजारेंगे.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद अगले 40 महीने के अंदर लॉन्च कर दिया जाएगा. रविशंकर ने कहा कि आज दुनिया ने अंतरिक्ष में भारत का लोहा माना है. दुनिया के अन्य देश भी सेटेलाइट लॉन्च के लिए इसरो की मदद ले रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी साल मिशन गगनयान का ऐलान किया था. इस मिशन के 2022 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है.

विकसित की जा चुकी है आवश्यक प्रौद्योगिकी

इससे पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के सिवान ने कहा था कि अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने वाली प्रौद्योगिकी विकसित की जा चुकी है. इस दिशा में मानव क्रू मॉड्यूल और पर्यावरण नियंत्रण तथा जान बचाने की प्रणाली जैसी प्रौद्योगिकी भी विकसित की जा चुकी है.

सिवान ने कहा कि 2022 में गगनयान को रवाना करने के इसरो जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल मार्क-III (GSLV Mark-III) का इस्तेमाल करते हुए दो मानवरहित मिशन और यानों को भेजेगा.

भारत बना दुनिया का चौथा ऐसा देश

भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश होगा. वायु सेना के पूर्व पायलट राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय थे. वहीं भारत में जन्मी कल्पना चावला और भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स भी अंतरिक्ष जा चुकी हैं.

ऐसे होगा एस्ट्रोनॉट का चयन

1) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने साल 2022 में मानवयुक्त अंतरिक्षयान भेजने की तैयारियों को तेज कर दिया है. इसके लिए देश की सवा अरब आबादी में से 30 बेहतरीन लोगों को चुनने की तैयारी की जा रही है.

2) एस्ट्रोनॉट बनने के दावेदार ये 30 लोग अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ होंगे. इन्हीं में से कई चरण वाली लंबी चयन प्रक्रिया के बाद ‘गगनयान’ से अंतरिक्ष में जाने वाला 3 लोगों की फाइनल टाइम तय होगी.

3) इन 30 एस्ट्रोनॉट के चयन की जिम्मेदारी इसरो ने भारतीय वायुसेना के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) को सौंपी है. आईएएम ने ही साल 1984 में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के यान से अंतरिक्ष में जाने वाले इकलौते भारतीय यात्री राकेश शर्मा का चयन 10 लोगों को परखने के बाद किया था.

4) आईएएम पहले ही इस मिशन में फ्लाइट सर्जन सपोर्ट, केबिन एयर क्वालिटी चेक, क्रू कैप्सूल की मानव इंजीनियरिंग व हेबीटेट मॉड्यूल की एडवांस ट्रेनिंग के लिए इसरो की मदद कर रहा है.

5) इस मिशन पर देश में बेस्ट फिजिकल फिटनेस के साथ सही मेंटल कंट्रोल के तालमेल वाले तीन एस्ट्रोनॉट का अंतिम तौर पर चयन होगा. लंबी चयन प्रक्रिया में देखा जाएगा कि वे मानसिक व मेडिकल तौर पर फिट हैं या नहीं और अकेले में मानसिक बदलावों से कैसे निपटते हैं.

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