कानपुर : कई विवादों के चलते सुर्ख़ियों में आये बारा टोलप्लाजा पर कानपुर नगर व देहात के वाहनों को टोल टैक्स से मुक्त रखने को जिला उद्योग व्यापार मंडल ने अनिश्चित कालीन धरने का निर्णय लिया है। टोल प्लाजा पर धरने को समर्थन देने के लिए अधिवक्ता समिति ने भी आश्वासन दिया है। इस धरने में अकबरपुर-रनिया से भाजपा विधायक प्रतिभा शुक्ला, एमएलसी विजय बहादुर पाठक और भोगनीपुर से भाजपा विधायक विनोद कटियार भी धरने में शामिल हुए।

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में जिला उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि कानपुर नगर व देहात के वाहनों से टोल समाप्त किए जाने की मांग को लेकर कई ज्ञापन दिए गए लेकिन कोई निर्णय न होने पर संगठन ने धरना आयोजित करने का निर्णय लिया है।

व्यापार मंडल के महामंत्री सूर्यकांत त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष ओमर व श्यामू गुप्ता ने कहा कि धरने में कारोबारियों को टोल से होने वाली दिक्कतें रखी जाएंगी। माल भाड़े में होने वाली वृद्धि व बिजली के काम के लिए रनियां उपकेंद्र जाने पर भी टोल देने की मजबूरी के चलते संगठन ने आंदोलन की रणनीति तय की है। उधर, अधिवक्ता समिति अकबरपुर की ओर से विज्ञप्ति जारी करते हुए मदन मोहन शुक्ल एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ता भी व्यापार मंडल के निर्णय के साथ हैं और प्रस्तावित धरने में सहयोग करेंगे। अधिवक्ताओं का कहना कई अधिवक्ता जो कानपुर नगर की सीमा में रहते हैं उन्हें कानपुर देहात की कोर्ट माती चले जाने के कारण रोजाना बारा टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है ऐसे में अधिवक्ताओं को भी टोल से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

वहीं बारा टोल प्लाजा को मुद्दा बनाने वाले क्षेत्रीय सांसद देवेन्द्र सिंह भोले इस धरने से दूर दिखे। जबकि वे बारा टोलप्लाजा को टोल फ्री करने के लिए केन्द्रीय परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर चुके हैं। देवेन्द सिंह भोले इस संबंध में पीएमओ को भी पत्र लिख चुके हैं।

साल 2016 में उन्होंने यहां तक ऐलान कर दिया था कि कानपुर और देहात के वाहनों से अब कोई टोल शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने परिवहन मंत्रालय का आदेश आने की बात तक कही थी। मीडिया में भी इस बारे में ख़बरें चलीं थीं। अगस्त 2016 में कहा गया था कि कानपुर नगर और देहात के निजी वाहनों के अलावा बुंदेलखंड से कानपुर आने वाले व्यावसायिक वाहनों को भी टोल नहीं देना पड़ेगा। भोले इस मुद्दे को काफी जोर शोर से उठा रहे थे। जुलाई 2016 में इस मामले को लेकर केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय की टीम ने यहां का दौरा भी किया था। 2 अगस्त 2016 को टैक्स ख़त्म करने पर सहमति बनने की बात कही गयी। इस बाद इस फैसले को ऐतिहासिक बताकर खूब सुर्खियां बटोरी गयीं। मिठाइयाँ बांटी गयी। हालांकि केन्द्रीय मंत्रालय का वो तथाकथित आदेश दिल्ली से चलकर रास्ते में ही कहीं गुम हो गया। उसके बाद धीरे-धीरे ये मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।

राजनीति की चौपाल में चर्चा है कि मामले में टोल प्रबन्धन के साथ अंदर ही अंदर डील हो गयी है। इसलिए इस मुद्दे को किनारे लगा दिया गया। आज के धरने में मुद्दे के जन्मदाता देवेन्द्र सिंह भोले के नामौजूदगी लोगों में चर्चा बनी रही। जबकि भाजपा के कई पदाधिकारी और विधायक भी यहां मौजूद थे।

मंडल का सबसे महंगा टोल

कानपुर मंडल में आने वाले सभी टोल प्लाजा में से बारा का टोल सबसे ज्यादा महंगा है। निजी चौपहिया वाहन से एक साइड में 125 तो दोनों ओर का 185 रुपए देना होता है। पांच रुपए फुटकर के चक्कर में कई बार तो वाहन चालकों को 190 रुपए देकर ही निकलना मजबूरी होता है। जांच टीम के सामने भी इसकी पुष्टि हुई थी। टोल प्लाजा पर कई बार वहां चालकों के अलावा टोल प्रबंधन के साथ राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं की मारपीट और झगडे हो चुके हैं जिसके चलते ये टोलप्लाजा कई बार विवादों में आ चुका है।  

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here