ई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब तीन महीने पहले ही ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन यानी मानव अंतरिक्ष मिशन को हरी झंडी दी थी। इसके बाद इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने (ISRO) धरती की निचली कक्षा (LEO) में किए जाने वाले प्रयोगों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि इसरो ऐसे 10 एक्सपेरीमेंट्स की लिस्ट तैयार कर रहा है, जिनमें मेडिकल इक्विपमेंट्स से लेकर माइक्रो बायोलॉजिकल एक्सपेरीमेंट्स शामिल होंगे। इनमें बायोलॉजिकल एयर फिल्टर और बायो सेंसर्स से लेकर लाइफ सपोर्ट और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट तक शामिल हैं, जो जहरीली गैसों की निगरानी कर सकेंगे।

बताते चलें कि ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह इसरो का अभी तक का सबसे बड़ा अभियान बनने जा रहा है। इसरो की विभिन्न प्रयोगशालाओं में कई टेक्नोलॉजी और सबसिस्टम पर काम चल रहा है।

एक अधिकारी ने बताया कि हमने 10 क्षेत्रों की पहचान की है, जिनके बारे में हमें दिलचस्पी है। हालांकि, हम अपने प्रयोगों को इन्हीं क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेंगे। इसके साथ ही देश के विभिन्न संस्थानों से इन क्षेत्रों में विशेष प्रयोगों को हासिल करेंगे। इसरो ने आधिकारिक रूप से LEO आधारित माइक्रोग्रेविटी के प्रयोगो के लिए मौकों की घोषणा की है।

संगठन ने कहा कि जैसे इसरो ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन की योजना बना रहा है, वह नेशनल साइंटिफिक कम्युनिटी से LEO के माइक्रोग्रेविटी प्लेटफॉर्म में प्रयोग करने के लिए इनपुट मांग रहा है। इसरो ने कहा कि इन प्रयोगों के लिए प्रस्तावित ऑर्बिट (कक्षा) धरती से करीब 400 किमी की ऊंचाई पर होगी। इन प्रयोगों को सामान्य कमरे के तापमान में किया जाएगा, जो करीब (0 से 4 डिग्री सेल्सियस) गोहा और दाब की स्थिति धरती की तरह होगी।

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