नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को ऐलान किया है कि वह राज्य में केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना लागू नहीं करेंगी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य के योगदान की अनदेखी कर स्वास्थ्य योजनाओं का सारा श्रेय खुद ले रहे हैं.

एक सार्वजनिक बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘वह डाकघरों के माध्यम से बंगाल के लोगों को पत्र भेजकर इस योजना का क्रेडिट खुद को दे रहे हैं.’ उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए डाकघरों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

राज्य सरकार देती है लगत का 40 प्रतिशत

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना को ममता स्वास्थ्य योजना के साथ विलय कर दिया गया था. वहां राज्य सरकार कुल लागत का 40 प्रतिशत कॉस्ट देती है. ममता ने कहा, ‘मोदी सरकार जिस तरह से इस योजना को पेश कर रही है उसमें पारदर्शिता की कमी है. जिसके कारण बंगाल में इस योजना को वापस लेने का फैसला लिया गया है. उन्हें श्रेय लेने दो.’

क्या है ‘आयुष्मान भारत’ योजना

‘आयुष्मान भारत’ एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है जो 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने 2017 में ऐसी ही एक ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना शुरू की थी. जो राज्य के लोगों को पेपरलेस और कैशलेस स्मार्ट कार्ड के आधार पर सुविधाएं देती है.

इस योजना के तहत सेकंडरी और टर्शियरी केयर के लिए हर साल 1.5 लाख रुपये का बेसिक हेल्थ कवर है. ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार का राज्य के मामलों और अन्य संस्थानों में इस्तक्षेप करने की आदत है. केंद्र सरकार लूट की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है.

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