स्पेशल डेस्क : हिजाब, ये शब्द सुनकर दुनिया भर में लोगों के दिमाग में मुस्लिम महिला की छवि ही बनती है. अभी कुछ ही दिनों पहले ही एक फतवा चर्चा का विषय बना था. इसमें कहा गया था कि महिलाएं डिज़ाइनर, टाइट फिटिंगवाले बुरके न पहना करें. हिजाब की बात आते ही दुनिया सीधे स्याह-सफेद में बंट जाती है.

इसके समर्थक इसे इस्लाम और महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हैं. जबकि इसके विरोधी इसे शोषण का प्रतीक बताते हैं. हिजाब को जितना एकरस बताया और समझा जाता है ये उससे कहीं ज्यादा विविधता भरा और पेचीदा इतिहास वाला है. सबसे बड़ी बात हिजाब की जड़ें इस्लाम से पुरानी हैं और दूसरे धर्मों में कहीं ज्यादा गहरी हैं.

इस्लाम से पहले था मौजूद

इस्लाम को आए अभी लगभग 1400 साल हुए हैं मगर हिजाब उससे पहले से मौजूद है. पुराने इजिप्ट में चेहरा ढकना अमीर महिलाओं का फैशन स्टेटमेंट था. दासियों, गुलामों को इसकी इजाज़त नहीं थी. ये बिलकुल वैसा ही था जैसा आज के समय किसी ब्रांड की महंगी ड्रेस पहनना.

इस चलन की एक खासियत थी. कबीलाई मिडिल ईस्ट में चेहरा ढके हुए महिलाओं पर चोर-उचक्के या दूसरे छोटे अपराधी हमला नहीं करते थे. क्योंकि पता होता था कि ये किसी कुलीन परिवार से है. जबकि खुले चेहरे वाली महिला के पीछे कोई समर्थ व्यक्ति नहीं है, ये पता रहता था. शायद यहीं से पर्दे और महिला सुरक्षा की धारणा पुख्ता हुई.

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आपकी सोच से ज्यादा ईसाई है हिजाब

आज पश्चिमी ईसाई देश भले ही हिजाब पर तमाम बैन लगा रहे हों मगर धार्मिक रूप से हिजाब ईसाई ज्यादा है. कुरान में पर्दे का ज़िक्र है मगर हिजाब या सर को ढकने का ज़िक्र नहीं है. वहीं ईसाइयत में सेंट पॉल लिख चुके हैं कि महिलाओं को सर ढकना चाहिए. यही नहीं ज़िक्र यहां तक है कि आदमी को सर ढकने की जरूरत नहीं. महिलाओं के लिए ये अनिवार्य है.

चर्च की नन को हेड स्कार्फ पहने हम सबने देखा होगा. ब्रिटिश शाही परिवार की महिलाएं कई सार्वजनिक जगहों पर हैट या वेल में दिखती हैं. ये उनकी सर ढकने वाली परंपरा का ‘मॉडिफाइड’ रूप है.

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गौरतलब है कि राजकुमारी डायना के सार्वजनिक जगहों पर सर न ढकने को लेकर उनकी बाकी शाही परिवार से काफी उठापटक हुई थी. वैसे शाही परिवार की नई सदस्य केट मिडल्टन अब कभी कभार ही हैट में दिखती हैं.

भारत में कैसे हुई पर्दा की शुरुआत

भारत की बात करें तो लोग अक्सर कहते हैं कि मुगलों या सल्तनत काल में पर्दा भारत में आया. महिलाओं ने आक्रमणकारियों से बचने के लिए खुद को ढकना शुरू किया. इस बात में बहुत कम ही सच है. ज्यादातर इतिहासकार मानते हैं कि भारत में पर्दा उत्तर वैदिक काल में आया. मगर उस समय ये सब पर थोपा नहीं गया था.

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सल्तनत काल शुरू होते-होते मिडिल-ईस्ट से आई ये धारणा भारतीयों के अंदर बैठने लगी कि अच्छे घरों की औरतें चेहरा ढक कर रखती हैं. कुछ सौ सालों में मिडिल ईस्ट की ये सोच भारतीय सवर्णों में भी आ गई.

मध्यकाल में पर्दा सबसे पहले राजपूत राजपरिवारों में फैलता दिखता है. अगर हम पारंपरिक भारतीय परिधानों जैसे साड़ी, घाघरा, चोली को देखें तो इनमें पूरे शरीर को ढकने जैसी सोच नहीं है.

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