स्पेशल डेस्क: हमारी जिंदगी में कई तरह की दादागीरी होती हैं. कही पर दादागीरी हम खुद करते है. तो कही पर हमारे साथ दादागीरी की जाती है.फिर चाहे वो घर हो. रिश्तेदार हो, दोस्त हो या फिर हमारा ऑफिस

दफ्तर में दादागीरी कई रूपों में हो सकती है. जैसे सहयोगियों पर चीखना-चिल्लाना, सबके सामने झिड़क देना, नौकरी से निकाल देने की धमकी देना वगैरह. इन सबका बुरा असर पड़ता है.

दफ्तर में होने वाले अपमान से न सिर्फ कर्मचारी आहत होते हैं, बल्कि कंपनी की साख और कमाई भी प्रभावित होती है.

दादागीरी के शिकार कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ जाती है. उनका जी उचट जाता है. उनका काम पूरा नहीं हो पाता.

कंपनी की खुशहाली और तरक्की के लिए दफ्तर में अच्छा माहौल होना ज़रूरी है. बॉस अपने साथ काम करने वालों के प्रति उदार रहे, यह भी जरूरी है. लेकिन ऐसा हो नहीं पाता. दफ्तरों में बॉस की दादागीरी ही चलती है.

स्टैंडफोर्ड मैनेजमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बॉब सटन से कई लोगों ने ई-मेल करके पूछा कि दफ्तर में गाली-गलौच करने वाले मैनेजरों का क्या किया जाए. प्रोफेसर सटन ने 2017 में “द ऐसहोल सर्वाइवल गाइड” प्रकाशित किया.

सवाल यह है कि यदि दफ्तरों में बदसलूकी के बुरे नतीजे इतने स्पष्ट हैं तो कंपनियां ऐसे बदतमीज और खूसट लोगों को काम पर रखती ही क्यों है?

वर्जीनिया बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पीटर बेल्मी और मैंने इस सवाल पर बहुत विचार किया.

हमने 900 से ज्यादा प्रतिभागियों के साथ कई तरह के प्रयोग किए. असल ज़िंदगी की तरह कुछ लोगों को एक साथ काम करने का मौका दिया गया.

कैसे लोगों के साथ काम करना पसंद करते हैं बॉस
ऐसा देखा गया कि अगर किसी व्यक्ति की कमाई सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके अपने परफॉर्मेंस पर निर्भर है तो वह ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहता है जो शरीफ हो और जिसका रवैया दोस्ताना हो, भले ही वह योग्य न हो.

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लेकिन अगर कमाई आंशिक तौर पर भी दूसरे लोगों के परफॉर्मेंस पर निर्भर है तो सामाजिकता और दोस्ताना काफी नहीं होती. तब कोई व्यक्ति ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ काम करना पसंद करता है जो योग्य हो.

सीधे-सादे शब्दों में कहें तो जब आपको मिलने वाली सैलरी या आपकी कमाई दूसरे लोगों के काम पर निर्भर है तो आप ऐसे लोगों को साथ काम करना पसंद करेंगे जो अपना काम अच्छे से कर पाए, न कि उन लोगों को चुनेंगे जिनसे आपका याराना है.

काबिलियत और गर्मजोशी का रिश्ताImage result for ऑफिस का माहौल रखना चाहिये अच्छाप्रिंसटन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर सुसैन फिस्के और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में लीडरशिप पढ़ाने वाली एमी कडी कहती हैं कि लोग मूल रूप से दो पैमानों पर दूसरों को आंकते हैं. पहला यह कि सामने वाला व्यक्ति निजी तौर कितना दोस्ताना है और दूसरे यह कि वह अपने काम में कितना काबिल है.

फिस्के, कडी और दूसरे शोधकर्ताओं ने पाया कि लोग यह मानकर चलते हैं कि गर्मजोशी का रिश्ता निभाना और काबिल होना एक साथ नहीं हो सकते.

यदि कोई व्यक्ति बहुत मिलनसार है तो मान लिया जाता है कि ऐसा उसकी मजबूरी है. यदि वह योग्य होता तो उसे इतना उदार होने की ज़रूरत नहीं होती.

समस्या तब शुरू होती है जब बदसलूकी को योग्य होने का पैमाना समझ लिया जाता है.

खूसट रवैया का प्रोत्साहनImage result for बॉस दादागीरी करता हैएप्पल के स्टीव जॉब्स, अमेजॉन के जेफ बेज़ोस और टेस्ला के एलन मस्क जैसे कॉरपोरेट लीडर दफ्तरों में उदारता या दोस्ताना रवैये के लिए नहीं जाने जाते. उनकी पहचान सहयोगियों से ज्यादा काम लेने के लिए है.

उन्होंने सफलता हासिल की, इसलिए उनके ये गुण असल में उनकी योग्यता कहलाने लगे.

सहयोगियों के साथ खूसट रवैया यदि कामयाबी दिला दे तो उसकी भी तारीफ होने लगती है. जब लोग देखते हैं कि वे कंपनी के लिए ज्यादा वैल्यू क्रिएट कर रहे हैं और उनकी अपनी वैल्यू भी बढ़ रही है तो आलोचना की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

लेकिन रिसर्च के नतीजे अपनी जगह कायम हैं. रिसर्च यह साबित करते हैं कि कंपनी में सहयोगियों के साथ बुरा सलूक वित्तीय रूप से नुकसानदेह है. मिसाल के लिए कई काबिल लोगों ने, जिनमें कुछ सह-संस्थापक भी थे, एप्पल कंपनी को अलविदा कह दिया क्योंकि उन्हें स्टीव जॉब्स का मैनेजमेंट स्टाइल पसंद नहीं था.

उबर से ट्रैविस कलानिक को निकाले जाने से कुछ महीने पहले इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, पॉलिसी एंड कम्युनिकेशंस के हेड, प्रोडक्ट एंड ग्रोथ के वाइस प्रेसिडेंट, मैप्स के वाइस प्रेसिडेंट और फाइनेंस विभाग के प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया था.

हैवलेट-पैकर्ड की पूर्व सीईओ कार्ली फिओरिना की इसलिए आलोचना होती है क्योंकि उन्होंने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की और एग्जीक्यूटिव टैलेंट कंपनी से बाहर हो गया.

यदि टैलेंट आपके बिजनेस की कामयाबी के लिए महत्वपूर्ण है तो एक उदार नजरिया अपनाने से टैलेंट बेस बढ़ता है और कंपनी की उत्पादकता भी सुधरती है.

इसलिए मैं एक ऐसे वर्क कल्चर को अपनाने का सुझाव देता हूं जैसा क्रिस्टिन पोराथ और सटन ने सुझाया है.

लोगों को नौकरी पर रखते समय काबिलियत को देखना महत्वपूर्ण है. इसके साथ दूसरों के साथ काम करने का गुण भी जरूरी है.

मुमकिन है कि इस बारे में कंपनियों को याद दिलाते रहने से दफ्तरों को ज्यादा मानवीय और गर्मजोशी से भरा बनाया जा सकता है. इससे कंपनी का आर्थिक फायदा भी होता है.

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