लखनऊ : खबर है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की नैया मोदी के सांसद नहीं बल्कि योगी के मंत्री पार लगायेंगे। महागठबंधन की और विपक्षी एकता के सामने अपने योद्धाओं को चुनना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।   

पिछले चुनाव में जबरदस्त मोदी लहर के चलते भाजपा ने 80 में से 71 सीटों पर कब्जा किया था और दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल के खाते में गयी थीं यानि 73 सीटों पर एनडीए का कब्ज़ा था लेकिन 5 सालों में परिस्थितियां बदल चुकी हैं। एक तरफ क्षत्रपों की साझेदारी से सामना है तो दूसरी ओर अपने रहे अपना दल की नाराजगी भी।  

कहा जा रहा है कि यूपी में बीजेपी के 2 दर्जन से ज्यादा सांसदों के टिकट पर तलवार लटकी है। दिलचस्प बात ये है कि इनकी जगह योगी सरकार के मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।

वहज क्या ?

वजह है बीजेपी का खुद का आन्तरिक सर्वे। मोदी के सहारे तमाम सांसद चुनाव जीत तो गए लेकिन जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। यानी लोग अपने सांसद को पसंद नहीं कर रहे हैं।

कैसे हुए सर्वे ?

नमो ऐप पर कराए गए सर्वे के अलावा आरएसएस ने अपनी तरफ से सर्वे किए हैं। जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पास भी ज्यादातर सांसदों के फीडबैक अलग से भेजे गए हैं। इसके अलावा कुछ एजेंसियों ने भी बीजेपी के लिए सर्वे किए हैं। इन सभी सर्वे में एक बात निकलकर सामने आ रही है कि अगर बीजेपी को उत्तर प्रदेश जीतना है तो जिन सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी है, उनका टिकट काटना ही होगा।

किनके कटेंगे टिकट?

इस बार के चुनाव में जिनका पत्ता काटने की तैयारी है उनमे ज्यादातर हैं मौसम के हिसाब से रंग बदलने वाले यानि दल-बदलू। इनके अलावा आरक्षित सीटों के ज्यादातर सांसद भी इस श्रेणी में बताए जा रहे हैं।

योगी के इन मंत्रियों पर भरोसा

सूत्र बता रहे है कि बीजेपी योगी सरकार के 10-12 मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतार सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक रीता बहुगुणा जोशी, बृजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, एसपी सिंह बघेल सहित कई ऐसे नाम हैं जो चुनाव मैदान का रुख कर सकते हैं।

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