नई दिल्ली : भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से सोने की मांग में कमी आ रही है। दिसंबर के मध्य में ये मांग भाव बढ़ने के कारण आधी हो गई है। भाव में गिरावट का कारण किसानों के पास नकदी की कमी है। ग्रामीण भारत में कुल सोने का सालाना 60 फीसदी खपत होती है। मांग कम होने के कारण इस हफ्ते डीलर सोने पर 10 से 12 डॉलर प्रति औंस (700 रुपए तक) का डिस्काउंट दे रहे हैं। पिछले हफ्ते 8 डॉलर का डिस्काउंट था।

बुलियन फेडरेशन के सेक्रेटरी हरेश आचार्य के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बहुत कम है। सामान्य तौर पर पूरे भारत में एक दिन में औसत 250 से 300 किलो सोने की मांग होती है पर अब ये सिर्फ 50 से 100 किलो के बीच है। ग्रामीण इलाकों के ज्वेलर्स बिक्री घटने से खुश नहीं हैं।

मध्यप्रदेश में सतना के गोल्ड मर्चेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट शंकर गौरी ने कहा कि किसानों के पास कोई रिजर्व फंड नहीं है। उन्होंने एसेट के तौर पर सोने में निवेश बंद कर दिया है। जो भी बिक्री हो रही है वो सिर्फ आगामी शादियों के सीजन के कारण हो रही है।

उत्तर प्रदेश में बरेली सर्राफा एसोसिएशन के प्रेसीडेंट राजकुमार अग्रवाल के मुताबिक सोने की बहुत कम मांग है। किसानों के पास नकदी नहीं है इसलिए वो सोने में निवेश नहीं कर रहे हैं। जब तक नकदी नहीं बढ़ती है तब तक बिक्री नहीं बढ़ेगी। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने का भाव 7 जनवरी को 32,650 रुपए प्रति 10 ग्राम था। इसके भाव में पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

भारत में सालाना 800 से 850 टन सोना बिकता है इसका 60 फीसदी किसान ही खरीदते हैं। कोटक महिंद्रा बैंक के सीनियर वीपी शेखर भंडारी के मुताबिक इस साल सोने के भाव 10 से 12 फीसदी बढ़ने की संभावना है।

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