Monday, November 19, 2018

गीत-गाथा

नई दिल्ली : ऊपर लिखे ये लाइने हालांकि मैंने किसी राजनीतिक परिदृश्य को देखकर नहीं लिखी हैं। ये दुष्यंत कुमार का लिखा हुआ शेर है जो बहुत से लोगों के लिए वर्तमान राजनीतिक परिदृश में मुफीद बैठ सकता है। खैर... हम बात कर रहे हैं दुष्यंत कुमार की। आज...
देश में सनसनी फैला रहे बाबाओं के कारनानों पर पढ़िए खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा की नई कविता... बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं अब भी बाबा पुकारता हूं अंतरात्मा की गहराईयों से क्योंकि...
मामूली हैं मगर बहुत खास है... बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और कड़ी मशक्कत से हासिल टिकट लेकर किसी विजेता की तरह पहली...
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राहुल पाण्डेय कानपुर के रहने वाले वीर रस के युवा कवि हैं. इस कार्यक्रम में सुनिए उनकी ओज और वीर रस से भरी कविताओं को साथ ही एक सन्देश जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने वालों के लिए. इनकी कविताओं से आपको राष्ट्रधर्म की प्रेरणा मिलेगी.
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गीत गाथा में इस बार मिलिए व्यंगकार और छंदकार संतोष सावन जी से और सुनिए एक प्यारा सा छंद - नजर से नजर मिली उनसे जैसे ही झन-झन मनवा का तार बजने लगा..  संतोष जी भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं और बहुआयामी प्रतिभा के धनी भी हैं. इस एपिसोड...
गीत गाथा में इस बार मिलिए वीर रस की कवियित्री शिखा सिंह से.. शिखा एक इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापिका भी हैं. सुनिए उनकी बेहतरीन कवितायेँ
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इस मुलाकात में मिलये गीत और गजलकार मनीष मीत से और सुनिए उनका सबसे प्यारा गीत - आवाज से के हमसे बुलाया भी न गया.. उनसे भी पलट के कभी आया भी न गया। और एक ग़ज़ल तौबा-तौबा

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