हैदराबाद: 7 नवम्बर 2018 को कार्तिक मास की अमावस्या तिथि है. भले ही इस दिन अमावस्या है लेकिन हिन्दू धर्म में इस दिन को रोशनी के पर्व यानी ‘दीपावली’ के नाम से मानया जाता है. दिवाली का शाब्दिक अर्थ ही है दीयों को श्रृंखला में लगाना. मान्यता है कि यही दीये अंधकरा पर प्रकाश, असत्य पर सत्य, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाते हैं.

Image result for Diwali 2018पुराणों के मुताबिक यह त्योहार उस दिन से मनाया जा रहा है जब श्रीराम लंकापति रावण को पराजित कर और अपना वनवास समाप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे. उस दिन अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात अपने-अपने घरों में घी के दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाई थी.

यहां जानिए दिवाली लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त, पूजा की सामग्रियों, पूजा- विधि और दिवाली से जुड़ी मान्यताएं के बारे में.

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 1 घंटा 58 मिनट तक रहेगा. इसी दौरान सभी घरों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा सम्पन्न की जाएगी.
लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 06:12 से 08:10 तक.Image result for दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली पूजा की सामग्री
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, लाल कपड़ा, सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, कमलगट्टे, कुशा, कुंकु, साबुत धनिया (जिसे धनतेरस पर खरीदा हो), खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, अक्षत, दही, दीपक, दूध, लौंग लगा पान, दूब घास, गेहूं, धूप बत्ती, मिठाई, पंचमेवा, पंच पल्लव तेल, मौली, रूई, पांच यज्ञोपवीत (धागा), रोली, लाल कपड़ा, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ.

Image result for दिवाली पूजन विधिपूजन विधि
दीपावली के दिन प्रातः स्नान और नित्यकर्म से निवृत्त होकर दिनभर का व्रत रखें. शाम के समय दोबारा स्नान करके किसी भी शुद्ध, सुन्दर, सुशोभित और शान्तिपूर्ण स्थान में वेदी बनाकर या चौकी आदि पर अक्षत आदि से अष्टदल लिखें और उस पर लक्ष्मी का स्थापन करके ‘लक्ष्म्यै नम:’ ‘इन्द्राय नम:’ और ‘कुबेराय नम:’ इन नामों से पूजन करें.

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